14 विद्याएँ और 64 कलाएँ
भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व केवल उनकी लीलाओं और पराक्रम से नहीं, बल्कि महर्षि सांदीपनि के आश्रम में प्राप्त शिक्षा, संस्कार और अनुशासन से पूर्ण हुआ। वहीं उन्होंने 14 विद्याओं, 64 कलाओं तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से विवेक, सेवा, धैर्य, कर्तव्य, राष्ट्र-भक्ति और नेतृत्व का पाठ सीखा। यही गुरु–शिष्य परंपरा उनके जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बनी और आगे चलकर उन्हें जगद्गुरु के रूप में प्रतिष्ठित किया।
14ऋग्वेद · न्याय
64गीत · व्यायामिकी
01गीत04आलेख्य07पुष्पास्तरण10शयन रचना13चित्राश्चयोग16नेपथ्य प्रयोग19भूषण योजन22हस्तलाघव25सूचीवान कर्म28प्रहेलिका31पुस्तकवाचन34पट्टिकावेत्रवान विकल्प37वास्तुविद्या40मणिरागाकर ज्ञान43शुक-सारिका प्रलापन46म्लेच्छित विकल्प49निमित्त ज्ञान52सम्पाठ्यम्55छन्दोज्ञान58वस्त्रगोपन61बालक्रीड़नक64व्यायामिकी01गीत04आलेख्य07पुष्पास्तरण10शयन रचना13चित्राश्चयोग16नेपथ्य प्रयोग19भूषण योजन22हस्तलाघव25सूचीवान कर्म28प्रहेलिका31पुस्तकवाचन34पट्टिकावेत्रवान विकल्प37वास्तुविद्या40मणिरागाकर ज्ञान43शुक-सारिका प्रलापन46म्लेच्छित विकल्प49निमित्त ज्ञान52सम्पाठ्यम्55छन्दोज्ञान58वस्त्रगोपन61बालक्रीड़नक64व्यायामिकी
02वाद्य05विशेषकच्छेद्य08दशनवसनांगराग11उदक वाद्य14माल्यग्रंथन17कर्णपत्र भंग20ऐन्द्रजाल23विचित्रशाकयूषभक्ष्य विकार क्रिया26सूत्रक्रीड़ा29प्रतिमाला32नाटकाख्यायिका दर्शन35तक्षकर्म38रूप्यरत्न परीक्षा41वृक्षायुर्वेद योग44उत्सादन-संवाहन-केशमर्दन कुशलता47देशभाषा विज्ञान50यन्त्रमातृका53मानसी56क्रियाकल्प59द्यूतविशेष62वैनायिकी विद्या02वाद्य05विशेषकच्छेद्य08दशनवसनांगराग11उदक वाद्य14माल्यग्रंथन17कर्णपत्र भंग20ऐन्द्रजाल23विचित्रशाकयूषभक्ष्य विकार क्रिया26सूत्रक्रीड़ा29प्रतिमाला32नाटकाख्यायिका दर्शन35तक्षकर्म38रूप्यरत्न परीक्षा41वृक्षायुर्वेद योग44उत्सादन-संवाहन-केशमर्दन कुशलता47देशभाषा विज्ञान50यन्त्रमातृका53मानसी56क्रियाकल्प59द्यूतविशेष62वैनायिकी विद्या
03नृत्य06तंडुलकुसुम वलिविकार09मणिभूमिका कर्म12उदकाघात15शेखर कापीडयोजन18गन्धायुक्ति21कौचुमार24पानकरस-रागासव योजन27वीणाडमरूकवाद्यानि30दुर्वाचक योग33काव्यसमस्यापूरण36तक्षण39धातुवाद42मेषकुक्कुट लावकयुद्ध विधि45अक्षरमुष्टि कथन48पुष्पशकटिका51धारणमातृका54अभिधानकोष57छलितयोग60आकर्षक्रीड़ा63वैजयिकी विद्या03नृत्य06तंडुलकुसुम वलिविकार09मणिभूमिका कर्म12उदकाघात15शेखर कापीडयोजन18गन्धायुक्ति21कौचुमार24पानकरस-रागासव योजन27वीणाडमरूकवाद्यानि30दुर्वाचक योग33काव्यसमस्यापूरण36तक्षण39धातुवाद42मेषकुक्कुट लावकयुद्ध विधि45अक्षरमुष्टि कथन48पुष्पशकटिका51धारणमातृका54अभिधानकोष57छलितयोग60आकर्षक्रीड़ा63वैजयिकी विद्या