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राष्ट्र में नव जागरण तथा उत्कर्ष के लिये भारत वर्ष और विश्व के पथ प्रदर्शक, युगावतार भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उज्जैन, मध्यप्रदेश को केन्द्र में रख कर की गई यात्रा के विभिन्न स्थलों के पुरान्वेषण तथा उन्हें तीर्थ के रुप में विकसित करने तथा सम्बन्धित क्षेत्रों के साहित्य, संस्कृति का संरक्षण, संवर्धन करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की स्थापना की गयी।

माननीय मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश

माननीय राज्यमंत्री, संस्कृति (स्वतंत्र प्रभार)

अपर मुख्य सचिव, संस्कृति

माननीय मुख्यमंत्री जी के सांस्कृतिक सलाहकार
भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व केवल उनकी लीलाओं और पराक्रम से नहीं, बल्कि महर्षि सांदीपनि के आश्रम में प्राप्त शिक्षा, संस्कार और अनुशासन से पूर्ण हुआ। वहीं उन्होंने 14 विद्याओं, 64 कलाओं तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से विवेक, सेवा, धैर्य, कर्तव्य, राष्ट्र-भक्ति और नेतृत्व का पाठ सीखा। यही गुरु–शिष्य परंपरा उनके जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बनी और आगे चलकर उन्हें जगद्गुरु के रूप में प्रतिष्ठित किया।
इसी आदर्श पर आधारित भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति प्रतियोगिता विद्यार्थियों को 14 विद्याओं, 64 कलाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन के लिए प्रेरित कर ज्ञान, संस्कृति और संस्कार से जुड़े राष्ट्रनिर्माण के मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रयास है।


श्रीकृष्ण पाथेय न्यास
संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन