इस शास्त्र में देशकाल एवं पात्र के अनुसार- समाज व्यवस्था के नियम, आचार-विचार तथा लोक व्यवहार, इन चार उपायों की चर्चा की गई है- इसके भी बीज ऋग्वेद में हैं जैसे -
सं गच्छध्वं सं वदध्वं........तथा
समानो मन्त्र: समिति: समानी समानं मन: सहचित्त मेषाम।।ब्राह्मणोस्य मुख मासीत् बाहू राजन्य: कृत:।समानी व आकूति: समाना हृदयानि व:'
